दोस्तो, अभी रमज़ान को गए हुए कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन मैंने देखा है कि हर साल इन्हीं दिनों कुछ लोग पूछना शुरू कर देते हैं, “अगला रमज़ान कब आएगा?” कोई छुट्टियां प्लान करना चाहता है, कोई परदेस से घर जाने का टिकट देख रहा है, और कुछ लोग बस इसलिए पूछते हैं कि दिल में रमज़ान का इंतज़ार रहता है। यही इंतज़ार तो ईमान की निशानी है। चलिए, जानते हैं कि रमज़ान 2027 कब शुरू होने की उम्मीद है और ईद उल फ़ित्र की संभावित तारीख़ क्या हो सकती है।
रमज़ान 2027 की मुमकिन तारीख़
माहिरीन-ए-फ़लकियात (खगोल विज्ञानियों) के हिसाब-किताब के मुताबिक़ रमज़ान 2027 का आग़ाज़ 8 फ़रवरी 2027, पीर (सोमवार) को होने का अंदाज़ा है। ईद उल फ़ित्र 9 या 10 मार्च 2027 को आ सकती है, यानी इस पर मुनहसिर है कि रमज़ान 29 दिन का होता है या 30 का। (स्रोत: Gulf News)
एक बात ज़ेहन में बिठा लीजिए, और यह मैं तालिब-ए-इल्मों को हमेशा समझाता हूं: यह तारीख़ अंदाज़ा है, यक़ीनी तारीख़ नहीं। इस्लाम में महीने की शुरुआत हिसाब-किताब से नहीं, बल्कि चांद देखने से तय होती है। रमज़ान की सही शुरुआत का पता चाँद दिखने की पुष्टि होने के बाद चलेगा।
इस वक़्त कौन सा इस्लामी महीना चल रहा है
आज के हिसाब से हिजरी साल 1448 का पांचवां महीना, जुमादा-उल-अव्वल चल रहा है। इसके बाद जुमादा-उस-सानी, फिर रजब, फिर शाबान, और उसके बाद रमज़ान आएगा। यानी हमारे पास अभी चार महीने से कुछ कम का वक़्त है। जो इंसान अभी से तैयारी शुरू कर दे, उसके लिए रमज़ान का मिज़ाज बिल्कुल अलग होता है। इस पर आगे बात करेंगे।
रमज़ान की तारीख़ चांद से क्यों तय होती है
बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं कि जब कैलेंडर में तारीख़ पहले से छपी होती है तो चांद का इंतज़ार क्यों? इसका जवाब क़ुरान और हदीस दोनों में मौजूद है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: “रमज़ान का महीना वो है जिसमें क़ुरान नाज़िल किया गया, जो लोगों के लिए हिदायत है… पस तुम में से जो इस महीने को पाए, वो इसके रोज़े रखे।” (सूरह अल-बक़रह: 185) और सूरह अल-बक़रह की ही आयत 189 में फ़रमाया कि लोग आपसे नए चांदों के बारे में पूछते हैं, तो कह दीजिए कि ये लोगों के लिए (वक़्त की) तारीख़ें और हज के पैमाने हैं।
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: “चांद देखकर रोज़ा रखो और चांद देखकर इफ़्तार करो (यानी ईद करो)। अगर बादल की वजह से चांद छुपा रहे, तो शाबान के तीस दिन पूरे कर लो।” (सही बुख़ारी: 1909, सही मुस्लिम: 1081) इसी हदीस की बुनियाद पर महीना 29 या 30 दिन का होता है। अगर 29 तारीख़ की शाम चांद नज़र आ गया तो महीना 29 का, वरना 30 का।
अलग-अलग मुल्कों में एक दिन का फ़र्क़ क्यों होता है
यह वो मसला है जिस पर हर साल बहस छिड़ जाती है, और अक्सर तल्ख़ी (कड़वाहट) भी हो जाती है। इसलिए इसे ठंडे दिल से समझ लीजिए।
चांद एक ही वक़्त में पूरी दुनिया में नज़र नहीं आता। कहीं पहले दिख जाता है, कहीं बाद में, और कहीं बादल या मौसम की वजह से नहीं दिखता। इसी वजह से अक्सर सऊदी अरब और खाड़ी के मुल्कों में रमज़ान पहले शुरू हो जाता है, और हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मशरिक़ी मुल्कों में अक्सर एक दिन बाद।
अब सवाल यह है कि हर मुल्क अपने इलाक़े की रुयत पर अमल करे या पूरी दुनिया में एक दिन रोज़ा हो? इस पर उलेमा की तीन मशहूर राएं हैं:
- मक़ामी रुयत: हर इलाक़े के लोग अपने यहां के चांद पर अमल करें। इस राय की एक दलील हज़रत कुरैब रज़ि. की रिवायत है जिसमें हज़रत इब्ने अब्बास रज़ि. ने शाम और मदीना के चांद के फ़र्क़ पर फ़रमाया कि नबी ﷺ ने हमें इसी तरह हुक्म दिया है। (सही मुस्लिम: 1087)
- आलमी रुयत: कहीं भी चांद की तसदीक़ हो जाए तो सब पर रोज़ा लाज़िम हो।
- खगोल विज्ञान के हिसाब और चाँद की रुयत: कुछ लोग और इदारे इस्लामी महीनों की शुरुआत तय करने में खगोल विज्ञान के हिसाब को अहमियत देते हैं। लेकिन नागरिक कैलेंडर में दर्ज तारीख़ और रमज़ान या ईद के धार्मिक ऐलान को एक ही चीज़ नहीं समझना चाहिए। सऊदी अरब में उम्म-अल-क़ुरा कैलेंडर इस्तेमाल होता है, जबकि रमज़ान और ईद की आधिकारिक तारीख़ की पुष्टि के लिए चाँद देखने से जुड़ी प्रक्रिया भी अहम है।
ये तीनों राएं अहल-ए-इल्म की हैं, और सबके पास अपनी दलीलें हैं। मेरा मशवरा यही है कि आप जिस मुल्क या शहर में रहते हैं, वहां की मोअतबर रुयत-ए-हिलाल कमेटी और अपने इलाक़े के उलेमा की बात पर अमल करें। एक ही घर में कोई सऊदी के हिसाब से और कोई हिंदुस्तान के हिसाब से रोज़ा रखे, इससे घर में इंतिशार (बिखराव) ही पैदा होता है, कोई फ़ायदा नहीं होता। और अगर किसी ने दूसरी राय पर अमल किया है, तो उस पर तानाज़नी न कीजिए।
तारीख़ की फ़िक्र से ज़्यादा ज़रूरी: तैयारी की फ़िक्र
हम में से अक्सर लोग रमज़ान का चांद देखकर एकदम से बेदार होते हैं, और पहले दस दिन जोश में गुज़रते हैं, फिर थकान और ग़फ़लत शुरू हो जाती है। जबकि अगर चार महीने पहले से थोड़ी तैयारी कर ली जाए तो पूरा महीना बाबरकत गुज़रता है।
1. पुराने रोज़े क़ज़ा हों तो अभी अदा कर लें। जिनके पिछले रमज़ान के रोज़े किसी उज़्र की वजह से बाक़ी रह गए हों, वो अगला रमज़ान आने से पहले उन्हें पूरा कर लें। हज़रत आयशा रज़ि. फ़रमाती हैं कि मेरे ऊपर रमज़ान के रोज़े होते थे और मैं उनकी क़ज़ा शाबान में ही कर पाती थी। (सही बुख़ारी: 1950, सही मुस्लिम: 1146)
2. शाबान में रोज़ों की आदत डालें। हज़रत आयशा रज़ि. ही फ़रमाती हैं कि मैंने नबी ﷺ को रमज़ान के सिवा किसी महीने के पूरे रोज़े रखते नहीं देखा, और शाबान से ज़्यादा किसी महीने में नफ़्ल रोज़े रखते नहीं देखा। (सही बुख़ारी: 1969, सही मुस्लिम: 1156) यानी शाबान रमज़ान की तैयारी का महीना है।
3. क़ुरान से रिश्ता मज़बूत कर लें। जो इंसान रमज़ान में क़ुरान ख़त्म करना चाहता है, वो अभी से रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा पढ़ना शुरू कर दे। अगर पढ़ना नहीं आता तो किसी क़ारी साहब से सीखना शुरू कर दे।
4. ज़कात का हिसाब देख लें। बहुत से लोग रमज़ान में ज़कात निकालते हैं। अगर साल पूरा होने की तारीख़ आपकी रमज़ान में पड़ती है तो अभी से अपने माल का हिसाब कर लें, ताकि आख़िरी लम्हे की भाग-दौड़ से बचें।
5. बुरी आदतों को छोड़ने की मश्क़ (अभ्यास) अभी से करें। सिगरेट, ग़ीबत, झूठ, फ़ुज़ूल सोशल मीडिया। रमज़ान का मक़सद ही तक़वा है, जैसा अल्लाह फ़रमाता है: “ऐ ईमान वालो! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए जैसे तुमसे पहले वालों पर किए गए थे, ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ।” (सूरह अल-बक़रह: 183) जो आदत रमज़ान में छोड़नी है, उसे अभी से आहिस्ता-आहिस्ता कम करना शुरू कीजिए।
6. नीयत और दुआ। नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जिसने रमज़ान के रोज़े ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ रखे, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (सही बुख़ारी: 38, सही मुस्लिम: 760) अभी से अल्लाह से दुआ मांगना शुरू कीजिए कि वो हमें रमज़ान तक पहुंचाए और उसकी क़द्र करने की तौफ़ीक़ दे।
एक बात और: “रजब और शाबान में बरकत की दुआ” के नाम से जो एक दुआ अक्सर शेयर की जाती है, उसकी सनद कमज़ोर बताई गई है। इसलिए ऐसी चीज़ें आगे भेजने से पहले तहक़ीक़ ज़रूर कर लीजिए।
परदेस में रहने वालों के लिए ख़ास बात
मैं जानता हूं कि हमारे बहुत से भाई खाड़ी के मुल्कों और दूसरे देशों में रोज़ी कमाने गए हुए हैं। अगर आप भी उनमें से हैं और रमज़ान में घर जाने का मंसूबा बना रहे हैं, तो टिकट बुक करते वक़्त तारीख़ में एक-दो दिन की गुंजाइश रखिए, क्योंकि चांद की तस्दीक़ के हिसाब से तारीख़ आगे-पीछे हो सकती है, और ईद के आसपास किराए भी बहुत बढ़ जाते हैं। यह भी याद रखिए कि जिस मुल्क में आप हैं, वहां के हिसाब से रोज़ा रखना और ईद करना आपका मामूल होगा, चाहे आपके घरवाले एक दिन बाद शुरू करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल:1 रमज़ान 2027 कब से शुरू होगा?
जवाब: फ़लकियाती अंदाज़े के मुताबिक़ 8 फ़रवरी 2027 (सोमवार) को। असली तारीख़ चांद की रुयत से तय होगी, इसलिए एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
सवाल:2 ईद उल फ़ित्र 2027 कब होगी?
जवाब: 9 या 10 मार्च 2027 को, इसका दारोमदार इस पर है कि रमज़ान 29 का हो या 30 का।
सवाल:3 क्या चांद देखे बिना कैलेंडर के हिसाब से रोज़ा रखना सही है?
जवाब: इस पर उलेमा की राय अलग-अलग है। बहुत से उलेमा और मुल्क रुयत पर, और कुछ इदारे हिसाब पर अमल करते हैं। अपने इलाक़े के मोअतबर उलेमा और रुयत-ए-हिलाल कमेटी के फ़ैसले की पैरवी करना सबसे महफ़ूज़ रास्ता है।
सवाल:4 सऊदी और हिंदुस्तान में रमज़ान एक दिन के फ़र्क़ से क्यों शुरू होता है?
जवाब: क्योंकि चांद हर जगह एक वक़्त पर नहीं दिखता, और बहुत से मुल्क अपने इलाक़े की रुयत पर अमल करते हैं। इसलिए अक्सर सऊदी में पहले और मशरिक़ी मुल्कों में एक दिन बाद शुरू होता है।
सवाल:5 अगर 29 शाबान को चांद न दिखे तो क्या करें?
जवाब: हदीस के मुताबिक़ शाबान के तीस दिन पूरे किए जाते हैं, और उसके अगले दिन रमज़ान शुरू होता है। (सही बुख़ारी: 1909)
सवाल:6 रमज़ान की तैयारी कब से शुरू करनी चाहिए?
जवाब: जितना जल्दी हो उतना बेहतर। कम से कम रजब से क़ुरान की तिलावत, क़ज़ा रोज़ों की अदायगी और बुरी आदतों से परहेज़ की मश्क़ (अभ्यास) शुरू कर दें, और शाबान में नफ़्ल रोज़े रखना सुन्नत से साबित है।
आख़िर में एक बात
रमज़ान 2027 का अंदाज़ा 8 फ़रवरी का है, मगर असली फ़ैसला चांद करेगा। इसलिए तारीख़ के पीछे भागने की बजाय, अपनी तैयारी पर ध्यान दीजिए। जब तक चांद दिखे, तब तक हमारे पास अपने दिल और अपनी आदतों को संवारने के लिए चार महीने से कुछ कम का वक़्त है। जो इंसान इस वक़्त का सही इस्तेमाल कर लेता है, वो रमज़ान को बोझ नहीं, इनाम समझकर इस्तक़बाल करता है। अल्लाह हम सबको सेहत और ईमान के साथ अगला रमज़ान नसीब फ़रमाए। आमीन।
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External Reference
- When will Ramadan 2027 begin? UAE astronomers share latest moon sighting forecasts, Gulf News
- हदीस जांचने के लिए: Sunnah.com, आयतें: Quran.com






