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शैतान कौन है? क़ुरआन और हदीस की रोशनी में पूरी हक़ीक़त

Table of Contents

Introduction

हम बचपन से एक नाम सुनते हुए आ रहे हैं – शैतान। जब भी कोई बुरा काम होता है, कोई लड़ाई होती है, या फिर नमाज़ में दिल नहीं लगता, तो हम सबसे पहले कहते हैं, “यह सब शैतान का काम है।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि असल में (शैतान कौन है)? वह कहाँ से आया? क्या वह पहले कोई फ़रिश्ता था या फिर जिन्न? उसका असली नाम क्या है और आख़िरकार वह इंसानों का इतना बड़ा दुश्मन कैसे और क्यों बन गया?

आज के इस दौर में, जहाँ हर तरफ़ गुनाह और बेहयाई आम होती नज़र आ रही है, हमारे लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि हमारा असल दुश्मन कौन है और वह किस तरह हमारे ईमान पर डाका डालता है। इंटरनेट पर इस टॉपिक को लेकर बहुत-सी झूठी कहानियाँ और मिथ्स मौजूद हैं। लेकिन एक सच्चे मुसलमान के तौर पर, हमें हर बात का जवाब सिर्फ़-ओ-सिर्फ़ क़ुरआन और सहीह हदीस से लेना चाहिए।

इस तफ़्सीली आर्टिकल में हम क़ुरआन-ए-करीम और सहीह अहादीस की रोशनी में शैतान की पूरी हक़ीक़त को समझेंगे। हम उसके उन धोखों को बेनक़ाब करेंगे जिनसे वह हम सभी को गुमराह करता है, और उन प्रैक्टिकल तरीक़ों को सीखेंगे जो अल्लाह और उसके प्यारे रसूल मुहम्मद ﷺ ने हमें सिखाए हैं।

शैतान कौन है (Shaitan Kaun Hai)? असली हक़ीक़त और उसका वजूद

शैतान कोई ख़याली किरदार या कोई पावर नहीं है जिसे इंसान ने ख़ुद सोच लिया हो, बल्कि वह एक असली और जीता-जागता वजूद है। इस्लाम हमें बताता है कि शैतान आग से पैदा किया गया और एक जिन्न है, न कि फ़रिश्ता।

लफ़्ज़ ‘शैतान’ असल में हर उस मख़लूक़ के लिए इस्तेमाल होता है जो नाफ़रमान, मुतकब्बिर और अल्लाह की राह से भटकी हुई हो। इस पूरी शैतानी फ़ौज का जो सरदार है, उसका असली नाम इब्लीस है।

क्या शैतान एक फ़रिश्ता था? (एक बड़ी ग़लतफ़हमी)

ज़्यादातर लोगों में यह ग़लतफ़हमी आम है कि शैतान पहले एक फ़रिश्ता था, जिसे बाद में उसकी नाफ़रमानी की वजह से आसमान से निकाल दिया गया। यह कॉन्सेप्ट ग़ैर-इस्लामी रिवायतों और Christian mythology से आया है। इस्लाम इस बात को बिल्कुल नकारता है कि शैतान एक फ़रिश्ता था।

क़ुरआन-ए-मजीद में अल्लाह तआला ने साफ़-साफ़ फ़रमाया है कि इब्लीस फ़रिश्ता नहीं, बल्कि जिन्नात में से था:

“और जब हमने फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सज्दा करो, तो इब्लीस के सिवा सब ने सज्दा किया। वह जिन्नात में से था, फिर उसने अपने रब के हुक्म की नाफ़रमानी की।”” (Surah Al-Kahf, Ayat 50)

फ़रिश्तों की यह ख़ुसूसियत होती है कि वे कभी भी अल्लाह की नाफ़रमानी नहीं कर सकते। उनके पास Free Will नहीं होता। वे वही करते हैं जो अल्लाह उन्हें हुक्म देता है (सूरह अत-तहरीम: 6)। इसके ख़िलाफ़, जिन्नात के पास इंसानों की तरह अपनी मर्ज़ी चुनने का इख़्तियार होता है — वे चाहें तो नेक बनें, चाहें तो गुनाहगार। इब्लीस ने अपनी Free Will का ग़लत इस्तेमाल किया और तकब्बुर के रास्ते पर चल पड़ा।

इब्लीस की कहानी: इबादतगुज़ार से मरदूद तक

इब्लीस पैदाइश के एतबार से जिन्न था, लेकिन उसने अल्लाह की इतनी इबादत की, इतनी ज़्यादा रियाज़त की, कि अल्लाह ने उसे एक ऊँचा मुक़ाम अता फ़रमाया था। वह आसमानों पर फ़रिश्तों के साथ रहने लगा और उनके साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह बयान करता था।

हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश और आज़माइश

जब अल्लाह तआला ने पहले इंसान और हमारे बाप, हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को मिट्टी से पैदा किया, तो अल्लाह ने फ़रिश्तों और वहाँ मौजूद इब्लीस को एक हुक्म दिया। और यह हुक्म उन सबकी इबादत का इम्तिहान था, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है और दिलों के राज़ से वाक़िफ़ रहता है।

क़ुरआन में इरशाद है:

“जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से फ़रमाया कि मैं मिट्टी से एक इंसान बनाने वाला हूँ। फिर जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ, तो तुम सब उसके आगे सज्दे में गिर पड़ना।”
(सूरह साद, आयत 71-72)

इब्लीस का तकब्बुर और इंकार

अल्लाह का हुक्म सुनते ही तमाम फ़रिश्तों ने फ़ौरन सज्दा किया। उन्होंने कोई सवाल नहीं किया, कोई नखरा नहीं दिखाया। लेकिन इब्लीस अपनी जगह पर खड़ा रहा। उसने सज्दा करने से बिल्कुल साफ़ इंकार कर दिया।

अल्लाह तआला ने उससे पूछा: “ऐ इब्लीस! तुझे किस चीज़ ने रोका उसको सज्दा करने से जिसे मैंने अपने दोनों हाथों से बनाया? क्या तूने तकब्बुर किया या तू बड़े दर्जे वालों में से था?” (सूरह साद, आयत 75)

इब्लीस ने जो जवाब दिया, वही उसकी हमेशा की तबाही का सबब बना। उसने दलील दी: मैं उससे बेहतर हूँ। ऐ अल्लाह! तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से पैदा किया।” (सूरह साद, आयत 76)

इब्लीस ने यहाँ पर ‘क़ियास’ (Logical Reasoning) किया, जो कि ग़लत था। उसने सोचा कि आग मिट्टी से ऊपर जाती है, इसलिए आग मिट्टी से अफ़ज़ल है। उसने यह नहीं देखा कि हुक्म देने वाली ज़ात कितनी बड़ी है। उसके इस तकब्बुर ने उसे पल भर में ‘आलिम और आबिद’ से ‘मरदूद’ बना दिया।

शैतान का क़यामत तक का चैलेंज

जब इब्लीस को उसके ही तकब्बुर की वजह से अल्लाह की बारगाह से निकाल दिया गया और उस पर लानत भेज दी गई, तो उसने अपनी ग़लती पर माफ़ी माँगने के बजाय ज़िद और दुश्मनी का रास्ता चुन लिया। उसने अल्लाह से क़यामत तक की मोहलत माँगी, ताकि वह हज़रत आदम और उनकी औलाद (इंसानों) से अपना बदला ले सके।

शैतान ने अल्लाह से क्या कहा?

क़ुरआन-ए-करीम में शैतान के उस खुले चैलेंज का ज़िक्र है जो उसने अल्लाह के सामने किया था:

“शैतान ने कहा: इस वजह से कि तूने मुझे गुमराह किया है, मैं ज़रूर उनके (इंसानों के) लिए तेरी सीधी राह (सिरात-अल-मुस्तक़ीम) पर बैठूँगा। फिर मैं उन पर उनके आगे से, उनके पीछे से, उनके दाएँ से और उनके बाएँ से आऊँगा, और तू उनमें से अक्सर को शुक्रगुज़ार नहीं पाएगा।” (सूरह अल-आराफ़, आयत 16-17)

यह आयत पढ़ते ही हर एक मुसलमान के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। शैतान ने हर तरफ़ से घेरने का चैलेंज किया है। वह हमारे सामने से आता है दुनिया की चकाचौंध लेकर, पीछे से आता है आख़िरत को भुलाने के लिए, दाएँ से आता है नेकियों में रियाकारी डालने के लिए, और बाएँ से आता है गुनाहों को ख़ूबसूरत बनाकर दिखाने के लिए।

लेकिन इस आयत में शैतान ने दो सिम्तें (यानी Directions) छोड़ दीं: ऊपर और नीचे।

शैतान के धोखे और उसके वार करने के तरीक़े (Tactics of Shaitan)

शैतान कोई आम दुश्मन नहीं है। उसके पास हज़ारों साल का एक्सपीरियंस है। वह इंसान की नफ़्सियात (Psychology) को बहुत अच्छे से जानता है। सहीह मुस्लिम की एक हदीस के मुताबिक़, शैतान इंसान के जिस्म में ख़ून की तरह दौड़ता है। इसलिए, वह अचानक सामने आकर हमला नहीं करता, बल्कि धीरे-धीरे हमारे दिलों में ज़हर घोलता रहता है।

चलिए समझते हैं कि शैतान कौन है (Shaitan Kaun Hai ?) और उसके वार करने के अहम तरीक़े क्या-क्या हैं:

1. ख़ुतुवात-उश-शैतान (धीरे-धीरे क़दम बढ़ाना)

शैतान कभी भी किसी सच्चे मुसलमान से पहली बार में यह नहीं कहेगा कि “चलो, आज शराब पी लो” या “ज़िना कर लो” या फ़लाँ-फ़लाँ। वह हमेशा छोटे-छोटे क़दम उठाने को कहता है। अल्लाह तआला क़ुरआन में बार-बार फ़रमाता है:

“ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! शैतान के क़दमों की पैरवी न करो (Do not follow the footsteps of Shaitan)।”
(सूरह अल-बक़रह, आयत 208)

  • Example: पहले वह आपको कहेगा कि “चलो, नमाज़ में थोड़ी देर हो गई तो क्या हुआ, बाद में पढ़ लेना।” फिर धीरे से नमाज़ क़ज़ा करवाएगा। फिर धीरे-धीरे नमाज़ ही छुड़वा देगा। इस तरह वह Step-by-Step इंसान को कुफ़्र की ओर तक ले जाता है। नमाज़ की अहमियत और उसको पाबंदी से अदा करने के फ़ज़ाइल के लिए हमारा आर्टिकल नमाज़ की अहमियत ज़रूर पढ़ें।

2. अल-वस्वसा (दिलों में बुरे ख़याल डालना)

शैतान का सबसे बड़ा हथियार है वस्वसा डालना। यह एक ऐसी धीमी आवाज़ होती है जो आपके दिल में आती है और आपको लगता है कि यह आपका अपना ही ख़याल है। वह आपको आने वाले कल से डराता है, ग़रीबी का ख़ौफ़ दिलाता है, और अल्लाह की रहमत से मायूस करता है।

“शैतान तुम्हें मुफ़लिसी (Poverty) से डराता है और तुम्हें बेहयाई का हुक्म देता है…”
(सूरह अल-बक़रह, आयत 268)

3. तज़य्युन (गुनाहों को ख़ूबसूरत बनाकर दिखाना)

शैतान बुरे कामों पर ऐसा पर्दा डालता है कि वह काम बहुत Attractive और Modern लगना शुरू हो जाता है।

  • सूद (Interest) को ‘Financial Growth’ या ‘Business Deal’ दिखाता है।
  • बेहयाई और नए-नए फ़ैशन को ‘Freedom’ और ‘Confidence’ का नाम देता है।
  • ग़ीबत (Backbiting) को ‘Time-pass’ या ‘दिल हल्का करना’ बनाकर पेश करता है।

4. तस्वील (नेकी को कल पर टालना)

जब कभी भी आप कोई अच्छा काम करने का सोचते हैं — जैसे क़ुरआन पढ़ना, सदक़ा देना, या तौबा करना — तो शैतान आपके दिल में डालता है: “अभी तो तुम बहुत जवान हो, बुढ़ापे में तौबा कर लेना।” या, “कल से पक्का नमाज़ शुरू करेंगे।”. याद रखना मेरे नौजवान भाइयों और बहनों, यह “कल” कभी नहीं आता, और इंसान इसी ग़फ़लत में मरकर दुनिया से चला जाता है।

शैतान का दरबार: वह अपने चेलों को कैसे इनाम देता है?

शैतान अकेला काम नहीं करता, उसके पास जिन्नात और इंसानों की एक पूरी फ़ौज है। वह हर रोज़ अपना दरबार लगाता है और अपने लश्कर को पूरी दुनिया में फ़ितना फैलाने के लिए भेजता है।

सहीह मुस्लिम की एक बहुत ही हैरतअंगेज़ और डरा देने वाली हदीस है। हज़रत जाबिर (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“इब्लीस अपना तख़्त पानी पर लगाता है, फिर अपने लश्करों को (फ़ितना फैलाने के लिए) भेजता है। उसके सबसे क़रीब उस चेले का मर्तबा होता है जो सबसे बड़ा फ़ितना फैलाता है। उनमें से एक आता है और कहता है: मैंने यह और यह किया। इब्लीस कहता है: तूने कुछ नहीं किया। फिर एक और आता है और कहता है: मैंने एक मियाँ-बीवी के दरमियान जुदाई (Divorce) करवा दी। इब्लीस उसे अपने गले से लगा लेता है और कहता है: हाँ, तूने बहुत बड़ा काम किया!”
(सहीह मुस्लिम: 2813)

इस हदीस से मालूम होता है कि घर को तोड़ना, मियाँ-बीवी में झगड़ा करवाना, और परिवार को बिखेरना शैतान का सबसे पसंदीदा काम है। क्योंकि जब एक घर टूटता है, तो पूरा समाज ख़राब होता है और बच्चे गुमराही की तरफ़ निकल जाते हैं।

शैतान की ख़ुसूसियतक़ुरआन/हदीस का हवालाप्रैक्टिकल सबक़
पैदाइश: जिन्नात से हैसूरह अल-कहफ़: 50वह फ़रिश्ता नहीं था, उसने जान-बूझकर तकब्बुर किया।
असली हथियार: वस्वसासूरह अन-नासदिल में आने वाले बुरे ख़यालों पर फ़ौरन अऊज़ु बिल्लाह पढ़ें।
कमज़ोरी: मोमिनीन पर बस नहीं चलतासूरह अल-हिज्र: 42अगर हम सच्चे मोमिन बनेंगे, तो शैतान हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
टारगेट: मियाँ-बीवी में तलाक़सहीह मुस्लिम: 2813घर के झगड़ों को हमेशा समझदारी से ख़त्म करें, ग़ुस्से में आकर फ़ैसले न लें।

शैतान के बारे में ग़लतफ़हमियाँ ?(Common Misconceptions)

हमारे समाज में शैतान को लेकर बहुत-सी ऐसी बातें मशहूर हैं जिनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। आइए चलिए उनका सच जानते हैं, आख़िर क्या है:

Misconception 1: “शैतान के पास अल्लाह के बराबर ताक़त है”

बहुत-से लोग सोचते हैं कि एक तरफ़ अल्लाह है जो अच्छाई का ख़ुदा है, और दूसरी तरफ़ शैतान है जो बुराई का ख़ुदा है (नऊज़ुबिल्लाह)। यह शिर्क का कॉन्सेप्ट है। शैतान अल्लाह की मख़लूक़ है। उसके पास अपनी कोई ताक़त नहीं है। वह सिर्फ़ इतना ही कर सकता है जितनी इजाज़त अल्लाह ने उसे आज़माइश के लिए दी है।

Misconception 2: “रमज़ान में सारे शैतान बंद होते हैं तो हम गुनाह क्यों करते हैं?”

सहीह बुख़ारी की हदीस है कि रमज़ान में सरकश शैतान बाँध दिए जाते हैं। लेकिन फिर भी लोग गुनाह करते हैं। इसकी दो बड़ी वजह हैं:

  1. नफ़्स का असर: इंसान के अंदर उसका अपना नफ़्स होता है, जो 11 महीने शैतान की सोहबत में रहकर बुराइयों का आदी हो चुका होता है।
  2. छोटे शैतान: सिर्फ़ बड़े और सरकश शैतान बंद होते हैं, छोटे जिन्नात या इंसानी शैतान तब भी एक्टिव हो सकते हैं।

शैतान के वार से बचने के प्रैक्टिकल तरीक़े (क़ुरआन और हदीस की रोशनी में)

अब सवाल यह भी पैदा होता है कि जब दुश्मन ही इतना शातिर है, तो हम उसके वार से कैसे बचें? अल्लाह तआला बहुत रहीम है। उसने अगर दुश्मन के बारे में बताया है, तो उससे बचने की ढाल भी हमें अता फ़रमाई है।

अगर आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इन तरीक़ों को अपना लेंगे, तो इंशाअल्लाह शैतान आपके पास आने से भी डरेगा।

1. इस्तिआज़ा (अल्लाह की पनाह माँगना)

जब भी दिल में कोई बुरा ख़याल आए, ग़ुस्सा आए, या कोई गुनाह करने का दिल करे, तो फ़ौरन पढ़ें:

أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ (अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम)

“और अगर शैतान की तरफ़ से कोई उकसाहट आए, तो अल्लाह की पनाह माँग लिया करो। यक़ीनन वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।” (सूरह अल-आराफ़, आयत 200)

2. आयतुल कुर्सी की तिलावत

सहीह बुख़ारी की एक लंबी रिवायत (हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु अन्हु वाली) से साबित है कि जो शख़्स रात को सोते वक़्त आयतुल कुर्सी (सूरह अल-बक़रह: 255) पढ़ता है, अल्लाह की तरफ़ से एक हिफ़ाज़त करने वाला फ़रिश्ता मुक़र्रर हो जाता है और शैतान सुबह तक उसके क़रीब नहीं आता।

3. घर में सूरह अल-बक़रह की तिलावत

अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाएँ। सहीह मुस्लिम की हदीस है:

“तुम अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाओ। यक़ीनन शैतान उस घर से भाग जाता है जिस घर में सूरह अल-बक़रह पढ़ी जाती है।” (सहीह मुस्लिम: 780)

4. बिस्मिल्लाह पढ़कर काम शुरू करना

खाना खाने से पहले, घर में दाख़िल होते वक़्त, और कपड़े उतारते वक़्त “बिस्मिल्लाह” पढ़ने की आदत ज़रूर डालें। हदीस के मुताबिक़, जब इंसान बिस्मिल्लाह पढ़कर घर में आता है, तो शैतान अपने चेलों से कहता है: “चलो, आज यहाँ तुम्हारे लिए न खाने का ठिकाना है और न ही सोने का।”

5. जमाअत के साथ नमाज़ और ज़िक्र

शैतान हमेशा अकेले इंसान पर जल्दी हमला करता है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि भेड़िया (Wolf) हमेशा उसी बकरी को खाता है जो गल्ले (Flock) से अलग हो जाती है। इसलिए मुसलमानों की जमाअत, अच्छी सोहबत और मस्जिद से जुड़े रहें। मुहर्रम का महीना इबादत, ज़िक्र और अल्लाह से क़ुर्बत हासिल करने का बेहतरीन मौक़ा है। इस सिलसिले में हमारा मुहर्रम 2027 और आशूरा पर मबनी आर्टिकल भी पढ़ें।

Important Lessons (अहम सबक़ जो हमें मिलते हैं)

  • तकब्बुर सबसे बड़ा गुनाह है: इब्लीस के पास इल्म और इबादत की कमी नहीं थी, लेकिन उसके अंदर के तकब्बुर ने उसे बर्बाद कर दिया। अल्लाह के फ़रमान के सामने पूरी तस्लीम-ओ-रज़ा की बेहतरीन मिसाल हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की ज़िंदगी में मिलती है। तफ़्सील के लिए हमारा आर्टिकल ज़रूर पढ़ें। हमें कभी भी अपनी नेकियों पर घमंड नहीं करना चाहिए।
  • शैतान सिर्फ़ वस्वसा डाल सकता है, मजबूर नहीं कर सकता: क़यामत के दिन शैतान साफ़ कह देगा कि: “मेरा तुम पर कोई ज़ोर नहीं था, मैंने तो सिर्फ़ बुलाया था और तुम मेरी बात मान गए। इसलिए आज मुझे बुरा-भला कहने के बजाय अपने आप को मलामत करो।” (सूरह इब्राहीम: 22). गुनाह का फ़ैसला हम ख़ुद करते हैं।
  • तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है: शैतान का मक़सद हमें गुनाह करवाना और फिर अल्लाह की रहमत से मायूस करना है। अगर हमसे कोई ग़लती हो जाए, तो हमें फ़ौरन सच्ची तौबा (इस्तिग़फ़ार) करनी चाहिए। अल्लाह हर गुनाह माफ़ करने वाला है।
  • ग़ुस्से पर क़ाबू रखें: ग़ुस्सा शैतान का सबसे आसान हथियार है। ग़ुस्से में इंसान अपना होश खो बैठता है और ऐसे फ़ैसले करता है जो उसकी ज़िंदगी तबाह कर देते हैं।

FAQ

Q1. क्या शैतान (इब्लीस) की मौत होगी या वह हमेशा ज़िंदा रहेगा?
Ans: शैतान हमेशा ज़िंदा नहीं रहेगा। उसने अल्लाह से क़यामत के दिन तक (या जब तक पहला सूर फूँका जाएगा) की मोहलत माँगी थी, जो अल्लाह ने उसे दे दी थी। जब क़यामत आएगी और सब मख़लूक़ फ़ना हो जाएगी, तब इब्लीस को भी मौत का मज़ा चखना पड़ेगा।

Q2. शैतान की पैदाइश किस चीज़ से हुई है?
Ans: क़ुरआन-ए-करीम की सूरह अल-हिज्र और सूरह अल-कहफ़ के मुताबिक़, शैतान (जो कि एक जिन्न है) की पैदाइश “नार-ए-समूम” यानी धुएँ के बग़ैर आग की लपट (Smokeless Fire) से हुई है।

Q3. वस्वसा और नफ़्स के ख़याल में क्या फ़र्क़ है?
Ans: शैतान का वस्वसा बदलता रहता है। अगर आप एक गुनाह नहीं करते, तो वह फ़ौरन दूसरे गुनाह की तरफ़ उकसाता है, क्योंकि उसे सिर्फ़ आपको भटकाना होता है। लेकिन नफ़्स का ख़याल एक ही बुराई पर अड़ा रहता है (जैसे किसी मख़सूस बुरी आदत की बार-बार तलब होना)।

Q4. क्या शैतान हमारे दिलों की बातें जान सकता है?
Ans: ग़ैब का इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है। शैतान हमारे दिलों के अंदर छुपी हुई बातें बिल्कुल सही तरीक़े से नहीं जान सकता, लेकिन वह हमारे चेहरे के एक्सप्रेशन्स, हमारी कमज़ोरियों और हमारे ख़ून के दौरान से यह अंदाज़ा लगा लेता है कि इस वक़्त हमारे दिल में क्या चल रहा है।

Q5. शैतान का दुश्मन कौन है?
Ans: शैतान का सबसे बड़ा दुश्मन हर वह मुसलमान है जो अल्लाह की इबादत करता है, सिरात-अल-मुस्तक़ीम पर चलता है और गुनाहों से बचता है। वह ख़ास तौर पर उनसे दुश्मनी रखता है जो नमाज़-ए-फ़ज्र के लिए उठते हैं और क़ुरआन की तिलावत करते हैं।

Q6. शैतान से हिफ़ाज़त के लिए सबसे बेहतर दुआएँ कौन-सी हैं?
Ans: सबसे बेहतर दुआएँ क़ुरआन की आख़िरी दो सूरह हैं— सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास। इसके साथ ही आयतुल कुर्सी और सुबह-शाम के मस्नून अज़कार पढ़ना बेहद ज़रूरी है।

Conclusion

इस तफ़्सीली गुफ़्तगू से यह साफ़ हो जाता है कि शैतान कौन है (Shaitan Kaun Hai) और उसकी हक़ीक़त क्या है। वह आग से पैदा किया गया एक जिन्न है, जो अपने तकब्बुर की वजह से बर्बाद हुआ। उसका चैलेंज बहुत बड़ा है और उसकी दुश्मनी दिलों में वस्वसे डालकर हमें गुमराह करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है।

लेकिन इस सब के बावजूद, एक मुसलमान को शैतान से डरने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में साफ़ फ़रमाया है:

“यक़ीनन शैतान का मक्र बहुत कमज़ोर है।”
(सूरह अन-निसा, आयत 76)

Mohammad Naushad

अस्सलामु अलैकुम! मेरा नाम मौहम्मद नौशाद है और मैं Deen Ki Roshni का फ़ाउंडर हूँ। मैं क़ुरआन, सहीह हदीस और भरोसेमंद इस्लामी किताबों की रोशनी में आसान हिंदी में इस्लामी मालूमात आप तक पहुँचाने की कोशिश करता हूँ। अगर मेरे लिखे हुए लेखों से किसी एक इंसान को भी दीन की सही समझ हासिल हो जाए, तो मैं इसे अपने लिए अल्लाह की बड़ी नेमत समझता हूँ।

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