देश के कोने-कोने से एक ही सदा उठ रही है – संविधान बचाओ, शरिया बचाओ, अपनी पहचान बचाओ। 17 सितंबर 2026 की तारीख अब सिर्फ एक कैलेंडर की तारीख नहीं रह गई, बल्कि यह उस मिल्लत की आवाज़ बन चुकी है जो वर्षों से अपने बुनियादी अधिकारों, अपने पर्सनल लॉ (Personal Law) और अपनी धार्मिक आज़ादी (Religious Freedom) को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर से “Save India, Save Sharia” नाम से एक ऐसा राष्ट्रव्यापी अभियान छेड़ने का ऐलान किया है, जिसकी गूंज पूरे मुल्क में सुनाई देगी।
आखिर क्यों जरूरी हो गया यह आंदोलन?
जब-जब किसी कौम के वजूद, उसकी शरई पहचान और उसके संवैधानिक हक़ों पर सवाल उठाया जाता है, तब-तब उस कौम का जागना लाज़मी हो जाता है। पिछले कुछ अरसे से समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर जिस तरह की बहसें छिड़ी हैं, उसने करोड़ों मुसलमानों के दिलों में एक गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। शरिया सिर्फ कुछ रस्में या रिवायतें नहीं, बल्कि यह हर उस मुसलमान की ईमानी ज़िम्मेदारी है जो अपने दीन पर अमल करना चाहता है। ऐसे में जब कानून के ज़रिए इस बुनियादी हक़ पर आंच आने की कोशिश हो, तो खामोश रहना मुनासिब नहीं। मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law) से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए यह भी पढ़ें: इस्लाम में औरत के हुक़ूक़ क्या हैं?
AIMPLB का यह ट्रेंडिंग कैंपेन (Trending Campaign) इसी एहसास-ए-ज़िम्मेदारी से पैदा हुआ है। बोर्ड का साफ कहना है कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक लंबी, सोची-समझी और लोकतांत्रिक तरीके से चलने वाली मुहिम है जो देश के हर राज्य, हर शहर तक पहुंचेगी।
जंतर-मंतर पर उमड़ेगा जनसैलाब

17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुल्क भर के जाने-माने उलेमा, मज़हबी संगठनों के नुमाइंदे और आम अवाम बड़ी तादाद में जुटने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह उस एकता की मिसाल बनेगा जो मुस्लिम कौम अपने संवैधानिक अधिकारों की हिफाज़त के लिए दिखाना चाहती है। वायरल हो रही खबरों के मुताबिक इस आयोजन को लेकर देशभर के मुस्लिम इलाकों में पहले से ही ज़बरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
संविधान, शरिया और अस्मत की लड़ाई (Save India, Save Sharia)
बोर्ड ने बार-बार यह साफ किया है कि यह मुहिम किसी के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की हिफाज़त के लिए है। यह कैंपेन इस बात की याद दिलाता है कि भारत का संविधान हर मज़हब को अपने तरीके से जीने का हक़ देता है, और शरिया उसी हक़ का एक अहम हिस्सा है।
रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड की ओर से अलग-अलग राज्यों में संभावित UCC कानूनों को कानूनी तौर पर चुनौती देने के लिए माहिर वकीलों की एक कमेटी भी बनाई जा रही है, ताकि हर मोर्चे पर , चाहे सड़क हो या अदालत, इस हक़ की जंग लड़ी जा सके।
आगे की राह: सिर्फ शुरुआत है जंतर-मंतर
जंतर-मंतर से उठने वाली यह चिंगारी यहीं नहीं थमेगी। बोर्ड की योजना के मुताबिक आने वाले महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसंपर्क अभियान, जागरूकता सभाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि हर मुसलमान – चाहे वह शहर में रहे या गांव में – इस मुहिम का हिस्सा बन सके।
17 सितंबर 2026 का दिन आने वाले वक्त में एक याद बनकर रह जाएगा या एक नई तहरीक की बुनियाद – यह वक्त ही बताएगा। मगर इतना तय है कि इस बार मिल्लत खामोश नहीं, बल्कि पुरअसर आवाज़ के साथ मैदान में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Que1. “Save India, Save Sharia” अभियान क्या है?
Ans. यह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसका मकसद संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, शरिया और मुसलमानों के नागरिक अधिकारों की हिफाज़त के लिए जनजागरूकता पैदा करना है।
Que2. यह अभियान कब और कहां शुरू होगा?
Ans. इस अभियान की शुरुआत 17 सितंबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर से होने की जानकारी सामने आई है।
Que3. इस अभियान को AIMPLB ने क्यों शुरू किया?
Ans. समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देशभर में चल रही बहस और मुस्लिम पर्सनल लॉ पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर बोर्ड ने यह कदम उठाया है, ताकि मुसलमानों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।
Que4. क्या यह अभियान सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन है?
Ans. नहीं, रिपोर्टों के मुताबिक यह अभियान 17 सितंबर के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिए आगे बढ़ाया जाएगा।
Que5. क्या बोर्ड UCC के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी करेगा?
Ans. जी हां, रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड की ओर से अलग-अलग राज्यों में संभावित UCC कानूनों को अदालत में चुनौती देने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक समिति बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
Que6. जंतर-मंतर के कार्यक्रम में कौन शामिल होगा?
Ans. खबरों के मुताबिक इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख उलेमा, मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होने की उम्मीद है।
नोट: 17 सितंबर 2026 को जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम की जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इस लेख में व्यक्त विचार और दावे संबंधित संगठन (AIMPLB) के अपने रुख को दर्शाते हैं।






