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नमाज़-ए-तहज्जुद पढ़ने का सही तरीका और इसकी फ़ज़ीलत

Table of Contents

Introduction

जब रात का आख़िरी पहर हो, हर तरफ़ ख़ामोशी ही ख़ामोशी हो, सब लोग गहरी नींद में सो रहे हों, और ऐसे में आप अपने अल्लाह के सामने सजदे में सर झुकाकर रो रहे हों, ज़रा सोचिए कितना हसीन मंज़र होगा। यह एक ऐसा एहसास है जो बयान से बाहर है। नमाज़-ए-तहज्जुद (Namaz-e-Tahajjud) अल्लाह तआला से गुफ़्तगू करने और उसके सबसे क़रीब होने का एक नायाब ज़रिया और तोहफ़ा है।

ज़्यादातर मुसलमान अपनी ज़िंदगी की परेशानियों, दिली ख़्वाहिशात और गुनाहों की माफ़ी के लिए तहज्जुद (Tahajjud) पढ़ना चाहते हैं, लेकिन सही मालूमात न होने की वजह से वह शुरू नहीं कर पाते। कुछ लोग सोचते हैं कि इसका तरीका बहुत मुश्किल है या इसके लिए किसी लंबी इबादत की ज़रूरत है।

इस मुकम्मल आर्टिकल में हम तहज्जुद (Tahajjud) पढ़ने का सही तरीका, इसका अफ़ज़ल वक़्त, रकअत की तादाद और इसकी अज़ीम फ़ज़ीलत को क़ुरआन और सहीह अहादीस की रोशनी में बिल्कुल आसान अल्फ़ाज़ में समझेंगे, इंशाअल्लाह, ताकि हर कोई इस बरकत वाली नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना सके।

तहज्जुद नमाज़ क्या है?

इसका लफ़्ज़ी मतलब है “नींद को छोड़ना” या “रात को उठना”।

इस्लामी टर्मिनोलॉजी में, ईशा की नमाज़ के बाद रात को सोकर उठने के बाद जो नफ़्ल नमाज़ अदा की जाती है, उसे नमाज़-ए-तहज्जुद (Namaz-e-Tahajjud) कहा जाता है।

तहज्जुद और क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) में फ़र्क

लोग अक्सर Tahajjud और क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) को एक ही समझते हैं, लेकिन इनमें थोड़ा-सा फ़र्क है।

  • Qiyam-ul-Lail: इसका मतलब है रात को इबादत के लिए खड़े होना। इसमें ईशा के बाद से लेकर फ़ज्र तक की तमाम इबादतें (नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र) शामिल हैं, चाहे आप सोकर उठे हों या बिना सोए इबादत कर रहे हों। रमज़ान में तरावीह भी क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) का हिस्सा है।
  • Tahajjud: यह क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) की ही एक ख़ास और अफ़ज़ल क़िस्म है। इस नमाज़ के लिए शर्त यह है कि इंसान रात को थोड़ी देर सोए और फिर उठकर नमाज़ पढ़े।

नफ़्ल इबादत की हैसियत

यह एक नफ़्ल नमाज़ है, यानी यह उम्मत पर फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। अगर आप इसे पढ़ते हैं तो इसका अज़ीम सवाब मिलता है, और अगर किसी वजह से छूट जाए तो कोई गुनाह नहीं होता।

हालाँकि, नबी-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद ﷺ और सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम इस नमाज़ का बहुत ज़्यादा एहतमाम फ़रमाते थे।

क़ुरआन में Tahajjud का ज़िक्र

अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-मजीद में कई जगह Tahajjud गुज़ार लोगों की तारीफ़ फ़रमाई है और इसकी अहमियत को बयान किया है।

सूरह अल-इस्रा (Surah Al-Isra) – आयत 79

अल्लाह तआला फ़रमाता है:

وَمِنَ اللَّيْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِ نَافِلَةً لَّكَ عَسَىٰ أَن يَبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَامًا مَّحْمُودًا

  • Transliteration: Wa minal-layli fatahaijad bihi nafilatal laka ‘asa any-yab’athaka Rabbuka Maqamam-Mahmuda.
  • Urdu Translation: और रात के एक हिस्से में इस (क़ुरआन) के साथ तहज्जुद पढ़ा करो। यह आपके लिए नफ़्ली (ज़्यादा) इबादत है। उम्मीद है कि आपका रब आपको मक़ाम-ए-महमूद पर फ़ाइज़ फ़रमाएगा।

Wazahat: इस आयत से मालूम होता है कि तहज्जुद (Tahajjud) हुज़ूर ﷺ के लिए एक ख़ास तोहफ़ा और बहुत ऊँचा दर्जा था, और इसकी बरकत से उन्हें मक़ाम-ए-महमूद अता किया जाएगा। उम्मत के लिए भी इसमें ऊँचे दर्जात की बिशारत है।

सूरह अस-सज्दा (Surah As-Sajdah) – आयत 16–17

मोमिनीन की सिफ़ात बयान करते हुए अल्लाह फ़रमाता है:

تَتَجَافَىٰ جُنُوبُهُمْ عَنِ الْمَضَاجِعِ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ خَوْفًا وَطَمَعًا

  • Transliteration: Tatajafa junubuhum ‘anilmadaaji’i yad’oona Rabbahum khawfan wa tama’aa.
  • Urdu Translation: उनके पहलू उनके बिस्तरों से अलग रहते हैं (यानी वह रात को उठते हैं), वह अपने रब को ख़ौफ़ और उम्मीद के साथ पुकारते हैं।”

सहीह अहादीस में तहज्जुद की फ़ज़ीलत

इस मुबारक नमाज़ की फ़ज़ीलत के बारे में बहुत-सी सहीह अहादीस मिलती हैं, जो इस नमाज़ की रूहानी अहमियत को वाज़ेह करती हैं।

1. फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़

सहीह मुस्लिम की एक रिवायत में रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

أَفْضَلُ الصِّلَاةِ بَعْدَ الْفَرِيضَةِ صَلَاةُ اللَّيْل (Sahih Muslim: 1163)

  • Urdu Translation: फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ रात की नमाज़ (तहज्जुद) है।

2. अल्लाह का आसमान-ए-दुनिया पर नुज़ूल

सबसे मशहूर और दिल को छू लेने वाली हदीस अल्लाह के नुज़ूल के बारे में है। हज़रत अबू हुरैरह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“हमारा रब हर रात उस वक़्त आसमान-ए-दुनिया पर नुज़ूल फ़रमाता है, जब रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा बाक़ी रह जाता है। अल्लाह फ़रमाता है: कौन है जो मुझे पुकारे, तो मैं उसकी दुआ क़बूल करूँ? कौन है जो मुझसे माँगे, तो मैं उसे अता करूँ? कौन है जो मुझसे माफ़ी माँगे, तो मैं उसे माफ़ करूँ?” (Sahih al-Bukhari: 1145, Sahih Muslim: 758)

3. जन्नत के ख़ूबसूरत महल

हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जन्नत में ऐसे बाला-ख़ाने (Rooms) हैं, जिनका बाहर का हिस्सा अंदर से और अंदर का हिस्सा बाहर से दिखाई देता है।”

एक बदवी (Bedouin) ने खड़े होकर पूछा: “ऐ अल्लाह के रसूल! यह किसके लिए हैं?”

आप ﷺ ने फ़रमाया: “जो नर्म गुफ़्तगू करे, खाना खिलाए, कसरत से रोज़े रखे, और रात को उठकर अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़े, जब लोग सो रहे हों।” (सुनन अत-तिर्मिज़ी: 1984, इमाम तिर्मिज़ी ने इसे हसन कहा है)

तहज्जुद पढ़ने का सही तरीका

Tahajjud Padhne Ka Sahi Tarika

इस नमाज़ को पढ़ने का सही तरीका बेहद ही आसान है। इसमें किसी ख़ास मुश्किल नियम की शर्त नहीं है। नीचे Step-by-Step तरीका बयान किया गया है।

1. तहज्जुद का वक़्त कब शुरू होता है?

इस नमाज़ का वक़्त ईशा की नमाज़ के बाद से लेकर फ़ज्र का वक़्त शुरू होने तक रहता है। लेकिन शर्त यह है कि आपने ईशा के बाद नींद पूरी की हो या थोड़ी देर सोए हों।

2. सबसे अफ़ज़ल वक़्त

रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा (Last 1/3rd of the Night) तहज्जुद (Tahajjud) के लिए सबसे आला-ओ-अफ़ज़ल वक़्त है, क्योंकि इस वक़्त अल्लाह तआला ख़ास तौर पर बंदों की दुआएँ सुनता है।

3. कितनी रकअत पढ़ सकते हैं?

  • कम से कम: 2 रकअत।.
  • ज़्यादा से ज़्यादा: आप जितनी चाहें पढ़ सकते हैं (2-2 रकअत करके)।.
  • सुन्नत तादाद: सुन्नत से साबित है कि नबी ﷺ आम तौर पर 8 रकअत और उसके बाद 3 रकअत वित्र पढ़ते थे (कुल 11 रकअत)।

हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है: “रसूलुल्लाह ﷺ रमज़ान और ग़ैर-रमज़ान में (रात की नमाज़ में) 11 रकअत से ज़्यादा नहीं पढ़ते थे।”(Sahih al-Bukhari: 1147)

4. इस नमाज़ की नियत

नियत दिल के इरादे का नाम है। ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं है।
दिल में यह सोचें: “मैं अल्लाह के लिए 2 रकअत नफ़्ल नमाज़-ए-तहज्जुद अदा कर रहा/रही हूँ।”

5. नमाज़ अदा करने का तरीका

यह नमाज़ बिल्कुल आम नफ़्ल नमाज़ की तरह ही पढ़ी जाती है।

  1. पहली रकअत: तकबीर-ए-तहरीमा (अल्लाहु अकबर) कहकर हाथ बाँधें। सना पढ़े, सूरह अल-फ़ातिहा के बाद कोई भी सूरह मिलाकर पढ़ें। रुकू और सजदा मुकम्मल करें।
  2. दूसरी रकअत: दूसरी रकअत के लिए खड़े हों। सूरह अल-फ़ातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ें। रुकू और सजदे के बाद तशह्हुद (अत्तहियात), दुरूद शरीफ़ और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर सलाम फेर दें।
  3. इसी तरह 2, 4, 6 या 8 रकअत अपनी तौफ़ीक़ के मुताबिक़ अदा करें।

6. वित्र का मामला

अगर आपने ईशा के वक़्त वित्र नहीं पढ़े थे, तो आप नमाज़ के बाद आख़िरी नमाज़ के तौर पर वित्र पढ़ें।
अगर आप ईशा के साथ ही वित्र पढ़ चुके हैं, तो अब दोबारा वित्र पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ़ 2-2 रकअत करके नफ़्ल पढ़ें।

तहज्जुद (Tahajjud) का Best Time

  • बहुत से लोगों को रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा निकालने में मुश्किल होती है। इसका आसान तरीका यह है:
  • मग़रिब के शुरू होने का वक़्त और अगले दिन फ़ज्र शुरू होने का वक़्त देखें।
  • उनके दरमियान के कुल घंटे (Total Hours) गिनें।
  • उन घंटों को 3 से तक़सीम करें।
  • जो आख़िरी हिस्सा बचेगा, वही सबसे बेहतरीन वक़्त है।

Example

वक़्त (Time)समय
मग़रिब का वक़्तEvening 7:00 PM
फ़ज्र का वक़्तMorning 4:00 AM
कुल घंटे9 घंटे
पहला तिहाई हिस्सा7:00 PM – 10:00 PM
दूसरा तिहाई हिस्सा10:00 PM – 1:00 AM
आख़िरी तिहाई हिस्सा (Best Time)1:00 AM – 4:00 AM

तहज्जुद (Tahajjud) में कौन-सी सूरह पढ़ना बेहतर है?

कोई ख़ास सूरह मुक़र्रर नहीं है।

  • आपको जो भी सूरह याद हो, आप उसे पढ़ सकते हैं।
  • अगर आपको लंबी सूरहें याद हैं (जैसे सूरह अल-बक़रह और सूरह आले-इमरान), तो उन्हें पढ़ना अफ़ज़ल है, क्योंकि नबी ﷺ रात को बहुत लंबी तिलावत फ़रमाते थे।
  • अगर आपको सिर्फ़ आख़िरी छोटी सूरहें (जैसे सूरह अल-इख़लास, सूरह अन-नास, सूरह अल-फ़लक़) याद हैं, तो आप उन्हीं के साथ नमाज़ अदा करें।

क्योंकि अल्लाह हमारी नियत देखता है, नमाज़ की लंबाई नहीं।

तहज्जुद (Tahajjud) के बाद कौन-सी दुआ पढ़ें?

सहीह अल-बुख़ारी में हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ जब रात को तहज्जुद (Tahajjud) के लिए उठते, तो यह अज़ीम दुआ पढ़ते थे। यह दुआ अल्लाह की तारीफ़ और तौहीद पर मबनी है।

اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ، وَلَكَ الْحَمْدُ لَكَ مُلْكُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمنْ فِيهِنَّ…

Transliteration

“Allahumma lakal-hamdu Anta Qayyimuz-samawati wal-ardi wa man fihinna, wa lakal-hamdu laka mulkus-samawati wal-ardi wa man fihinna…”

Urdu Translation:

“ऐ अल्लाह! तेरे ही लिए सब तारीफ़ है। तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है, सब को क़ायम रखने वाला है। और तेरे ही लिए तारीफ़ है। आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है, सब की बादशाहत तेरे ही लिए है…” (Sahih al-Bukhari: 1120)

आप इस मस्नून दुआ के बाद अपनी भाषा (उर्दू, हिंदी, English) में अपने दिल की हर बात अल्लाह से कह सकते हैं।

तहज्जुद (Tahajjud) की 10 बड़ी फ़ज़ीलतें

  1. दुआएँ क़बूल होने का वक़्त: इस वक़्त माँगी गई दुआ रद्द नहीं होती। (सहीह मुस्लिम)
  2. अल्लाह की मोहब्बत: रात को नींद क़ुर्बान करने वाले से अल्लाह बहुत मोहब्बत फ़रमाता है।
  3. चेहरे का नूर: सालिहीन का मानना है कि रात की इबादत करने वालों गुज़ार लोगों के चेहरे पर एक ख़ास नूर होता है।
  4. गुनाहों से माफ़ी: यह नमाज़ गुनाहों का सफ़ाया करती है और बुराइयों से रोकती है।
  5. सेहत के लिए बेहतर: रात को उठना और इबादत करना जिस्म को एक्टिव रखता है।
  6. दुनिया से बेफ़िक्री: इंसान के अंदर दुनिया का ख़ौफ़ कम हो जाता है और सुकून मिलता है।
  7. जन्नत में दाख़िला: जैसा कि हदीस में बयान किया गया, यह जन्नत के महल पाने का ज़रिया है।
  8. नबी ﷺ की सुन्नत पर अमल: यह हमारे प्यारे नबी ﷺ की सबसे पसंदीदा इबादत थी।
  9. मुश्किलात का हल: परेशानियों के वक़्त यह नमाज़ अदा करना दिल को मज़बूत करता है।
  10. ख़ातिमा बिल-ख़ैर: कसरत से तहज्जुद पढ़ने वाले को ईमान पर मौत नसीब होती है (इंशाअल्लाह)।

अगर आप नमाज़ के बारे में और उसकी अहमियत के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारा यह आर्टिकल नमाज़ की अहमियत: मरयम और हुसैन की इबादत का असर जाकर पढ़ें।

तहज्जुद (Tahajjud) के बारे में आम ग़लतफ़हमियाँ

हमारे समाज में कुछ ग़लत बातें मशहूर हैं, जिन्हें दूर करना बहुत ज़रूरी है। आइए इन्हें समझते हैं।

  • ग़लतफ़हमी 1: ” सिर्फ़ बुज़ुर्ग या परहेज़गार लोग ही पढ़ सकते हैं।”
    • हक़ीक़त: यह बिल्कुल ग़लत है। एक आम इंसान या गुनाहगार शख़्स भी अल्लाह से दोस्ती करने के लिए यह पढ़ सकता है। यह सबके लिए है, किसी एक के लिए ख़ास तौर पर नहीं है।
  • ग़लतफ़हमी 2: “अगर एक बार शुरू कर दी, तो रोज़ पढ़ना फ़र्ज़ हो जाता है।”
    • हक़ीक़त: यह हमेशा नफ़्ल ही रहेगी। अगर आप किसी दिन नहीं उठ सके, तो कोई गुनाह नहीं होगा। लेकिन कोशिश करनी चाहिए कि इसकी आदत बनी रहे।
  • ग़लतफ़हमी 3: “सिर्फ़ 8 रकअत ही पढ़ना ज़रूरी है।”
    • हक़ीक़त: अगर आपके पास वक़्त कम है, तो आप सिर्फ़ 2 रकअत भी पढ़ सकते हैं। 8 रकअत अफ़ज़ल और सुन्नत है, लेकिन शर्त नहीं है।

FAQs

Q1:क्या बिना सोए यह नमाज़ पढ़ सकते हैं?
Ans: तहज्जुद (Tahajjud) का अस्ल लफ़्ज़ी मतलब ही सोकर उठना है। अगर आप बिना सोए रात को नमाज़ पढ़ते हैं, तो उसे क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) या नफ़्ल नमाज़ कहा जाएगा, जिसका अपना सवाब है। लेकिन यह नमाज़ का पूरा सवाब सोकर उठने से मिलता है।

Q2: अगर फ़ज्र का वक़्त शुरू होने में 10 मिनट बचे हों, तो क्या तहज्जुद (Tahajjud) पढ़ सकते हैं?
Ans: हाँ, जब तक फ़ज्र का वक़्त शुरू नहीं होता, आप पढ़ सकते हैं। अगर वक़्त कम हो, तो जल्दी से 2 रकअत पढ़ सकते हैं।

Q3: क्या औरतों के लिए तहज्जुद (Tahajjud) का तरीका अलग है?
Ans: नहीं, औरतों के लिए भी पढ़ने का वही तरीका है जो मर्दों के लिए है। वह अपने घर में सुकून से इसे अदा कर सकती हैं।

Q4: क्या तहज्जुद (Tahajjud) के बाद वित्र पढ़ना ज़रूरी है?
Ans: अगर आपने ईशा के साथ वित्र नहीं पढ़े थे, तो तहज्जुद (Tahajjud) के बाद पढ़ना ज़रूरी है। अगर ईशा के साथ पढ़ लिए थे, तो अब दोबारा पढ़ने की ज़रूरत नहीं।

Q5: क्या तहज्जुद (Tahajjud) अकेले ही पढ़नी चाहिए या जमाअत से?
Ans: अकेले (Individually) पढ़ना ही अफ़ज़ल है। रमज़ान में क़ियाम-उल-लैल (Qiyam-ul-Lail) यानी तरावीह जमाअत से होती है, लेकिन आम दिनों में इसे अकेले ही पढ़ना चाहिए।

Conclusion

नमाज़-ए-तहज्जुद (Namaz-e-Tahajjud) अल्लाह तआला का एक बहुत बड़ा तोहफ़ा है, जो उसने अपने बंदों को दिया है ताकि वह रात की ख़ामोशी में अपने रब से दिल की बातें कह सकें। यह नमाज़ दुनिया और आख़िरत, दोनों को सँवारने का बेहतरीन ज़रिया है।

अगर आपने अभी तक यह नमाज़ अदा करना शुरू नहीं किया, तो आज ही से पढ़ने की नियत करें। शुरू में चाहे सिर्फ़ 2 रकअत ही पढ़ें, लेकिन इस अज़ीम बरकत से ख़ुद को महरूम न रखें। अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा रखें और सच्चे दिल से दुआ करें, क्योंकि वह हमेशा सुनता है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो और इससे मालूमात मिली हों, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार (Family) के साथ ज़रूर शेयर करें, ताकि दूसरे लोग भी इस बरकत वाली नमाज़ से जुड़ सकें।

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Mohammad Naushad

अस्सलामु अलैकुम! मेरा नाम मौहम्मद नौशाद है और मैं Deen Ki Roshni का फ़ाउंडर हूँ। मैं क़ुरआन, सहीह हदीस और भरोसेमंद इस्लामी किताबों की रोशनी में आसान हिंदी में इस्लामी मालूमात आप तक पहुँचाने की कोशिश करता हूँ। अगर मेरे लिखे हुए लेखों से किसी एक इंसान को भी दीन की सही समझ हासिल हो जाए, तो मैं इसे अपने लिए अल्लाह की बड़ी नेमत समझता हूँ।

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